पार्क की जमीन पर ‘प्लॉटिंग गेम’! अलकनंदा टाउनशिप में बवाल, बच्चों के हक पर बिल्डर का कब्ज़ा?
जनपद हरिद्वार के पिरान कलियर क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायनपुर और शांतरशाह स्थित अलकनंदा टाउनशिप में उस समय हड़कंप मच गया, जब कॉलोनी वासियों ने बिल्डर हीरो रियलिटी प्रा. लि. पर गंभीर आरोपों की बौछार कर दी। निवासियों का कहना है कि जिस ग्रीन पार्क और बच्चों के खेलने के लिए सुरक्षित भूमि का सपना दिखाकर उनसे प्लॉट बेचे गए थे, आज उसी जमीन को खुर्द-बुर्द कर अवैध प्लाटिंग में तब्दील किया जा रहा है।
🌳 “बच्चों का पार्क छीनकर बेच दिया”
गुस्साए कॉलोनीवासियों ने खुलकर विरोध जताते हुए बताया कि प्लॉट खरीदते समय कंपनी ने बड़े-बड़े पार्क, हरियाली और बच्चों के खेलने की जगह का वादा किया था। इतना ही नहीं, आधिकारिक नक्शों में भी इन ग्रीन एरिया और पार्कों का स्पष्ट उल्लेख था। लेकिन अब हालात बिल्कुल उलट हैं—जहां बच्चों की किलकारियां गूंजनी चाहिए थीं, वहां प्लॉट काटकर बेचे जा रहे हैं।
निवासियों का कहना है कि इस धोखाधड़ी से न सिर्फ उनका भरोसा टूटा है, बल्कि बच्चों के खेलने का एकमात्र सुरक्षित स्थान भी उनसे छीन लिया गया है। बच्चे मायूस हैं और अभिभावक आक्रोशित।
📄 फर्जी कागजात और सरकारी जमीन पर भी नजर?
मामला केवल पार्क तक सीमित नहीं है। शिकायतकर्ताओं ने उत्तराखंड के मुख्य सचिव को भेजे गए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि बिल्डर फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी भूमि—जैसे चक रोड और नालियों—पर भी कब्जा करने की कोशिश कर रहा है।
चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई कि जो सड़कें नक्शे में 26 मीटर चौड़ी दिखाई गई थीं, वे जमीनी हकीकत में कुछ ही दूरी पर सिमटकर 16 मीटर रह गई हैं। इससे पूरे प्रोजेक्ट की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
⚖️ जांच की मांग, कार्रवाई का इंतजार
कॉलोनीवासियों ने संबंधित विभागों को सूचना देकर ग्रीन पार्क की जमीन पर हो रही प्लाटिंग को तुरंत रुकवाने और वहां मूल स्वरूप में पार्क विकसित करने की मांग की है। साथ ही पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की भी मांग उठाई गई है।
🏢 अधिकारियों का बयान
वहीं, एचआरडी अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो बिल्डर के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अब बड़ा सवाल यही है कि आखिर कब तक “कुंभकरण की नींद” में सोए अधिकारी जागेंगे? क्या बच्चों के हक का पार्क वापस मिलेगा या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा? कॉलोनीवासियों की निगाहें अब प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी
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