Mon. May 25th, 2026
आधुनिक शिक्षा, नई एजुकेशन पॉलिसी और संस्कारों की आवश्यकता पैराडाइज एकेडमी इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल सुभाष चंद की कलम से।सुभाष चंद प्रधानाचार्य पैराडाइज एकेडमी बुधवाशहीद, भगवानपुर, हरिद्वार।
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आधुनिक शिक्षा, नई एजुकेशन पॉलिसी और संस्कारों की आवश्यकता
पैराडाइज एकेडमी इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल सुभाष चंद की कलम से।

 

सुभाष चंदप्रधानाचार्य पैराडाइज एकेडमी बुधवाशहीद, भगवानपुर, हरिद्वार।
सुभाष चंद
प्रधानाचार्य
पैराडाइज एकेडमी
बुधवाशहीद, भगवानपुर, हरिद्वार।

 

NEPAL GIRI//POLICE ACTION NEWS//BHAGWANPUR

ज का समय आधुनिक शिक्षा, डिजिटल तकनीक और तेजी से बदलती जीवनशैली का दौर है। शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं रही, बल्कि अब यह व्यक्तित्व निर्माण, नैतिक मूल्यों, व्यवहारिक ज्ञान और तकनीकी दक्षता का माध्यम बन चुकी है। नई शिक्षा नीति (NEP) ने शिक्षा के क्षेत्र में अनेक सकारात्मक बदलाव लाने का कार्य किया है, जिसका उद्देश्य बच्चों को केवल डिग्रीधारी बनाना नहीं, बल्कि उन्हें जीवन के हर क्षेत्र में सक्षम और आत्मनिर्भर बनाना है।
शिक्षा का वास्तविक अर्थ केवल अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं होता, बल्कि एक अच्छे इंसान का निर्माण करना होता है। आज समाज में “असली शिक्षा क्या है?” इस पर बहुत चर्चा होती है। वास्तव में असली शिक्षा वही है जो बच्चों को संस्कार, अनुशासन, आत्मविश्वास, जिम्मेदारी और समाज के प्रति सम्मान का भाव सिखाए। यदि कोई छात्र पढ़ाई में बहुत अच्छा है लेकिन उसमें नैतिकता और व्यवहार की कमी है, तो उसकी शिक्षा अधूरी मानी जाएगी।
पैराडाइज एकेडमी इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल सुभाष चंद का मानना है कि आज शिक्षा जगत में अनेक चुनौतियां तेजी से बढ़ रही हैं। आधुनिक समय में मोबाइल फोन और सोशल मीडिया बच्चों के भविष्य के सामने एक बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं। कई छात्र पढ़ाई से अधिक समय मोबाइल पर व्यर्थ कर देते हैं, जिससे उनका ध्यान भटकता है और मानसिक विकास भी प्रभावित होता है। ऐसे समय में माता-पिता की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है।
सुभाष चंद जी सभी अभिभावकों से अनुरोध करते हैं कि वे बच्चों पर विशेष ध्यान दें। बच्चों को मोबाइल देना आसान है, लेकिन उन्हें सही दिशा देना सबसे महत्वपूर्ण है। माता-पिता यदि बच्चों के साथ समय बिताएं, उनकी पढ़ाई पर ध्यान दें और उनके व्यवहार को समझें, तो बच्चे निश्चित रूप से बेहतर भविष्य की ओर बढ़ेंगे।
सुभाष चंद जी स्वयं एक अत्यंत ईमानदार, मेहनती और समर्पित शिक्षक हैं। उन्होंने अपना पूरा जीवन शिक्षा क्षेत्र को समर्पित किया है। आज जब वे पैराडाइज एकेडमी इंटर कॉलेज में प्रिंसिपल के पद पर कार्यरत हैं, तब भी वे केवल प्रशासनिक कार्यों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि विद्यालय में पूरे आठों पीरियड पढ़ाते हैं। वे इंग्लिश विषय के शिक्षक हैं और बच्चों को विषय की गहराई से समझ देने पर विशेष ध्यान देते हैं। उनका मानना है कि पढ़ाई का सही तरीका बच्चों को समझाना सबसे जरूरी है, ताकि छात्र कठिन विषयों को भी सरलता से समझ सकें।
वे केवल पढ़ाने तक ही सीमित नहीं रहते, बल्कि विद्यालय की व्यवस्थाओं, अनुशासन, वातावरण और छात्रों की आवश्यकताओं पर भी लगातार ध्यान देते हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि विद्यालय केवल भवनों से नहीं चलता, बल्कि वहां का वातावरण, शिक्षक की निष्ठा और छात्रों के प्रति समर्पण ही उसकी असली पहचान बनाते हैं।
सुभाष चंद जी कहते हैं —
“मेरा उद्देश्य कभी धन अर्जित करना नहीं रहा। मेरी सबसे बड़ी इच्छा यही है कि हमारे विद्यालय से निकलने वाले छात्र अपने माता-पिता, गांव और समाज का नाम रोशन करें। मैं अपना पूरा जीवन शिक्षा जगत को समर्पित करूंगा और मरते दम तक छात्रों को निराश नहीं होने दूंगा।”
पैराडाइज एकेडमी इंटर कॉलेज लगातार उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम दे रहा है। विद्यालय के छात्र अपने गांव, परिवार और विद्यालय का नाम निरंतर रोशन कर रहे हैं। इस वर्ष भी विद्यालय का परीक्षा परिणाम सर्वोत्तम रहा, जो यहां की गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा और शिक्षकों की मेहनत का प्रमाण है।
नई शिक्षा नीति का मुख्य उद्देश्य भी यही है कि बच्चों को रटने वाली शिक्षा से बाहर निकालकर व्यवहारिक और रचनात्मक शिक्षा दी जाए। आज बच्चों को केवल किताबों का ज्ञान नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला भी सीखनी होगी। खेल, तकनीक, भाषा, विज्ञान, नैतिक शिक्षा और सामाजिक समझ — ये सभी आधुनिक शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं।
आज आवश्यकता इस बात की है कि विद्यालय, शिक्षक और अभिभावक मिलकर बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए कार्य करें। यदि बच्चों को सही मार्गदर्शन, अनुशासन और सकारात्मक वातावरण मिलेगा, तो वे निश्चित रूप से देश और समाज के लिए आदर्श नागरिक बनेंगे।
पैराडाइज एकेडमी इंटर कॉलेज का उद्देश्य केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि ऐसे विद्यार्थियों का निर्माण करना है जो ज्ञान, संस्कार और आत्मविश्वास से परिपूर्ण हों। यही वास्तविक शिक्षा है और यही एक मजबूत राष्ट्र की पहचान भी।

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